
भारतीय सिनेमा का इतिहास ग्लैमर और मनोरंजन से भरा पड़ा है, लेकिन ‘पीपली लाइव’ जैसी फिल्में समाज को आईना दिखाती हैं। 2010 में रिलीज हुई अनुषा रिजवी की इस पहली निर्देशन कृति ने किसानों की बदहाली और ग्रामीण भारत की सच्चाइयों को हास्य के साथ प्रस्तुत किया। सनडांस फिल्म फेस्टिवल में इसके प्रीमियर ने दुनिया भर में तहलका मचा दिया।
13 मार्च 1978 को दिल्ली में जन्मीं अनुषा रिजवी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक किया। पत्रकारिता में कदम रखते ही उन्होंने डॉक्यूमेंट्री बनाईं और समाज की गहराइयों को छुआ। सरकारी योजनाओं की विफलताओं और आम आदमी की मुश्किलों को करीब से देखा, जो उनकी फिल्मों का मूल बना।
फिल्म की कहानी एक कर्जमुक्त किसान के आत्महत्या के फैसले से शुरू होती है, जो मीडिया और राजनीति के तमाशे में बदल जाती है। यह व्यंग्य सिस्टम की खामियों पर करारा प्रहार करता है। सनडांस की सफलता के बाद यह 83वें अकादमी अवॉर्ड्स में भारत की ओर से नामांकित हुई।
‘पीपली लाइव’ ने दर्शकों को सोचने पर विवश किया और स्वतंत्र सिनेमा को नई दिशा दी। अनुषा रिजवी आज भी सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित कहानियां बुन रही हैं, जो समाज को झकझोरती हैं।