
भारतीय टेलीविजन इतिहास की सबसे बड़ी घटना ‘रामायण’ के निर्माण के दौरान कई रोचक किस्से सामने आए हैं। इन्हीं में से एक है अभिनेता सुनील लहरी की कहानी, जिन्होंने लक्ष्मण का रोल करने का सपना देखा था, लेकिन किस्मत ने उन्हें सुमित्रा नंदन के रूप में अमर कर दिया।
1980 के अंत में जब रामानंद सागर अपनी महाकाव्य धारावाहिक के लिए कलाकार चुन रहे थे, सुनील लहरी भगवान राम के परम भक्त और योद्धा लक्ष्मण की भूमिका के लिए तैयार हुए। उनकी फिटनेस, अभिनय क्षमता और भावनात्मक गहराई ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने ऑडिशन में लक्ष्मण के महत्वपूर्ण दृश्य बखूबी निभाए – लंका पर पुल बनाने से लेकर भाई के प्रति निष्ठा तक।
लेकिन सागर साहब की नजर में लहरी के लिए कुछ और ही बेस्ट था। उन्होंने लक्ष्मण की जगह सुमित्रा नंदन का किरदार ऑफर किया। सुमित्रा का सबसे छोटा पुत्र, जो अयोध्या के राजघराने का अहम हिस्सा था। यह भूमिका भले छोटी थी, लेकिन लहरी ने इसे जीवंत कर दिया। उनकी चंचलता और राजसी ठाठ ने दर्शकों को बांध लिया।
‘रामायण’ प्रसारण के दौरान पूरे देश में हाहाकार मच गया। रविवार का इंतजार घर-घर में होता था। लहरी को लाखों प्रशंसकों का प्यार मिला। ‘शुरू में निराशा हुई, लेकिन यह रोल मेरे लिए वरदान साबित हुआ,’ उन्होंने बाद में बताया। आज भी सोशल मीडिया पर उनके फैन पेज सक्रिय हैं।
यह घटना साबित करती है कि कभी-कभी ठुकराई गई राह ही सबसे बेहतरीन साबित होती है। सुनील लहरी की कहानी हर संघर्षरत कलाकार के लिए प्रेरणा है। ‘रामायण’ का जादू आज भी बरकरार है, और सुमित्रा नंदन के चेहरे पर सुनील लहरी का नाम अमिट हो चुका है।