
बॉलीवुड के सुनहरे दौर की एक ऐसी अभिनेत्री जिनके बिना वह दौर अधूरा सा लगता है, वह हैं नंदा। छोटी कद-काठी लेकिन दिलों पर अमिट छाप छोड़ने वाली यह ‘छोटी बहन’ अपने टैलेंट और लगन से स्टार बन गईं।
फिल्मी परिवार में जन्मी नंदा ने बचपन से ही संघर्ष शुरू किया। ‘आनंद भैरवी’ जैसी फिल्मों से चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में कदम रखा, फिर ‘परख’, ‘कनून’ में हीरोइन बनीं। राज कपूर, देव आनंद के साथ उनकी जोड़ी ने जादू बिखेरा।
नंदा की खासियत थी उनकी सादगी। वे स्क्रीन पर आम लड़की, प्यारी बहन, वफादार पत्नी बन जातीं, जो दर्शकों से सीधा जुड़ाव पैदा करती। 60 के दशक में ‘तीन देवियां’, ‘ज्वेल थीफ’ जैसी फिल्मों ने उन्हें शिखर पर पहुंचाया।
शादी के बाद उन्होंने परिवार को प्राथमिकता दी, लेकिन उनकी फिल्में आज भी जीवंत हैं। नंदा का सफर बताता है कि सच्ची सफलता मेहनत से ही मिलती है।