
भारत के जंगलों, खेतों और बस्तियों में घूमने वाली गोह या मॉनिटर लिजार्ड प्रकृति का अनमोल तोहफा है। यह विशालकाय छिपकली अपनी लंबी दोफंकी जीभ से हवा का जायजा लेती है और शिकार का पता लगाती है। आमतौर पर इसे विषैली समझा जाता है, लेकिन बंगाल मॉनिटर में कोई जहर नहीं होता। कोमोडो ड्रैगन जैसी कुछ विदेशी प्रजातियों में हल्का विष हो सकता है, पर भारतीय गोह पूरी तरह सुरक्षित है। काटने पर घाव गहरा हो सकता है, क्योंकि इसके मुंह में बैक्टीरिया होते हैं—यह मांसाहारी शिकारी है जो कीड़े, चूहे, सांप, मेंढक और छोटे परिंदों का शिकार करती है।
छोटे गोह कीड़े खाते हैं, जबकि बड़े शिकार पकड़ते हैं। जीभ हवा में फेंककर जैकबसन अंग से सुगंध का विश्लेषण कर यह कुशलतापूर्वक शिकार करती है। पारिस्थितिकी के लिए यह वरदान है—कीटों और चूहों को नियंत्रित कर फसलें बचाती है। दुधवा जैसे अभयारण्यों में इनकी अच्छी संख्या है, मानसून में विशेष सक्रियता दिखती है। मादाएं मिट्टी खोदकर अंडे देती हैं।
तस्करी और अंधविश्वास से संख्या घट रही है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित यह प्रजाति मारना-बेचना अपराध है। विशेषज्ञ चेताते हैं कि गोह को खत्म करना पर्यावरण के लिए घातक है। जागरूकता से ही इसे बचा सकते हैं।