
बॉलीवुड के इतिहास में कुछ जोड़ियां अमर हो जाती हैं। निर्देशक मनमोहन देसाई और सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की साझेदारी ऐसी ही एक मिसाल है। 70 और 80 के दशक में दोनों ने मिलकर ऐसी फिल्में बनाईं जो आज भी दर्शकों के दिलों पर राज करती हैं। उनका रिश्ता महज प्रोफेशनल नहीं, बल्कि गहरी दोस्ती और अटूट विश्वास का प्रतीक था।
इसकी सबसे यादगार मिसाल मिलती है ‘अमर अकबर एंथनी’ की सफलता की भव्य पार्टी में। उत्साह के उस माहौल में मनमोहन देसाई ने अमिताभ से कहा, ‘तुम मुझे छोड़कर चले जाओ तो पता नहीं, लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा।’ यह वचन उन्होंने जीवन भर निभाया।
26 फरवरी 1937 को मुंबई में जन्मे मनमोहन देसाई ने सहायक निर्देशक के रूप में करियर शुरू किया। दर्शकों की नब्ज पकड़ते हुए उन्होंने ‘धरम वीर’, ‘चाचा भतीजा’, ‘परवरिश’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। लेकिन अमिताभ के साथ ‘अमर अकबर एंथनी’ ने नई इबारत लिखी।
फिर शुरू हुई उनकी सुनहरी सिलसिला- ‘सुहाग’, ‘नसीब’, ‘देश प्रेमी’, ‘कुली’, ‘मर्द’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’। लगभग हर फिल्म सुपरहिट रही, जो अमिताभ को एंग्री यंग मैन के रूप में स्थापित करने में सहायक बनी।
इंटरव्यू में देसाई ने अमिताभ को अपनी फिल्मों की रूह बताया, तो बच्चन ने भी देसाई को करियर की बुलंदियों का श्रेय दिया। 1 मार्च 1994 को देसाई का निधन हो गया, लेकिन उनका बॉन्ड सिनेमा के पन्नों में हमेशा जीवित रहेगा।