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ममता शंकर: घुंघरुओं की धुन से सिनेमा तक का सफर

कथक की थिरकनों और घुंघरुओं की गूंज के बीच पली-बढ़ी ममता शंकर आज भारतीय नृत्य जगत की एक प्रमुख शख्सियत हैं। उदय शंकर के घर में जन्मीं ममता को कला उनके खून में मिली हुई है। उनके पिता ने भारतीय नृत्य को...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|मनोरंजन|
January 5, 2026
ममता शंकर: घुंघरुओं की धुन से सिनेमा तक का सफर
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कथक की थिरकनों और घुंघरुओं की गूंज के बीच पली-बढ़ी ममता शंकर आज भारतीय नृत्य जगत की एक प्रमुख शख्सियत हैं। उदय शंकर के घर में जन्मीं ममता को कला उनके खून में मिली हुई है। उनके पिता ने भारतीय नृत्य को नई दिशा दी, और ममता ने उसी विरासत को आगे बढ़ाया।

बचपन से ही स्टेज पर नजर आने वाली ममता ने पंडित बिरजू महाराज जैसे गुरुओं से कथक सीखा। उनकी प्रस्तुतियां क्लासिकल और मॉडर्न का अनोखा संगम हैं, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। ममता शंकर बैले ट्रुप के जरिए उन्होंने सैकड़ों शो किए, जो मिथकों और समसामयिक मुद्दों पर आधारित हैं।

सिनेमा में भी उनका योगदान कमाल का है। सत्यजीत राय की फिल्मों से लेकर खुद की निर्देशित रचनाओं तक, नृत्य को कहानी का हिस्सा बनाया। कोलकाता से लेकर विदेशों तक उनके प्रदर्शन सराही जाते हैं।

आज भी सक्रिय ममता नई पीढ़ी को प्रशिक्षित कर रही हैं। चुनौतियों के बावजूद उनकी लगन ने उन्हें सम्मान दिलाए। ममता शंकर कला की जीती-जागती मिसाल हैं, जो साबित करती हैं कि सच्ची प्रतिभा कभी बूढ़ी नहीं होती।

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