
चेन्नई: तमिल सुपरस्टार विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ के सेंसर सर्टिफिकेट में हो रही देरी पर मद्रास हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) से शिकायतों की पूरी फाइल तलब कर ली है। जस्टिस अनीता सुमंथ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान साफ कहा कि बिना ठोस आधार के सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को लंबा नहीं खींचा जा सकता।
फिल्म के प्रोड्यूसर्स द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 5 दिसंबर को अगली सुनवाई मुकर्रर की है। ‘जन नायकन’ के डायरेक्टर एच. विनोथ हैं और यह फिल्म लाइका प्रोडक्शंस का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। फिल्म में विजय के अलावा पूजा हेगड़े, बॉबी देओल और प्रकाश राज मुख्य भूमिकाओं में हैं।
सूत्रों के अनुसार फिल्म 10 नवंबर को चेन्नई के सीबीएफसी ऑफिस में सर्टिफिकेशन के लिए भेजी गई थी। शुरुआती स्क्रीनिंग के बाद कुछ संशोधन कर दिए गए, लेकिन कुछ अज्ञात राजनीतिक समूहों की शिकायतों के बाद मामला दिल्ली मुख्यालय भेज दिया गया। प्रोड्यूसर्स का कहना है कि यह राजनीतिक हस्तक्षेप का मामला है।
विजय के आगामी राजनीतिक करियर को देखते हुए फिल्म को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। फिल्म का कथानक भ्रष्टाचार और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित बताया जा रहा है, जिससे कुछ राजनीतिक दलों में खलबली मच गई है। इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि सेंसर बोर्ड का यह रवैया सृजनात्मक स्वतंत्रता पर हमला है।
तमिल सिनेमा में सितारों का राजनीति में प्रवेश नया नहीं है, लेकिन विजय जैसे सुपरस्टार के मामले में चुनौतियां बढ़ जाती हैं। ‘जन नायकन’ को पोंगल 2025 के लिए रिलीज किया जाना है, जिसमें भारी कमाई की संभावना है। बजट 250 करोड़ रुपये से अधिक होने के कारण देरी से प्रोड्यूसर्स को भारी नुकसान हो रहा है।
फिल्म चैंबर और प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने कोर्ट के हस्तक्षेप का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सेंट्रल बोर्ड को निष्पक्ष रहना चाहिए और राजनीतिक दबाव में आकर फिल्मों को रोकना गलत है। विजय के प्रशंसक भी सोशल मीडिया पर #ReleaseJanaNayakan ट्रेंड कर रहे हैं।
कोर्ट के इस आदेश से सेंसर प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। उम्मीद है कि सीबीएफसी शिकायतों का सही सत्यापन करेगा और फिल्म को जल्द सर्टिफिकेट देगा। तमिल सिनेमा के इस बड़े प्रोजेक्ट को दर्शक बेसब्री से देख रहे हैं।