
बॉलीवुड की अमर अभिनेत्री मधुबाला का जिक्र होते ही पुरानी फिल्मों की यादें ताजा हो जाती हैं। 14 फरवरी 1933 को दिल्ली में मुमताज जहां बेगम के नाम से जन्मीं यह दीवानी हसीना नौ साल की उम्र में ‘बसंत’ से डेब्यू कर चुकी थीं। उनकी खूबसूरती और अभिनय ने उन्हें जल्द ही सुपरस्टार बना दिया, जो देश-विदेश में मशहूर रहीं।
उस जमाने में भारतीय हीरोइन को हॉलीवुड से ऑफर मिलना दुर्लभ था। ऑस्कर विजेता फ्रैंक कैप्रा ने उन्हें बड़ी फिल्मों के लिए आमंत्रित किया। यह मौका उन्हें वैश्विक पटल पर पहुंचा सकता था, लेकिन मधुबाला ने साफ मना कर दिया। परिवार और वतन को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने यह कदम उठाया। इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यह उनके करियर के लिए कठिन फैसला था, मगर मूल्यों से समझौता नहीं किया।
22 सालों में करीब 70 फिल्में कीं—’महल’, ‘मुगल-ए-आजम’, ‘चलती का नाम गाड़ी’ जैसी कालजयी कृतियां। बचपन की गरीबी से लेकर दिल की गंभीर बीमारी तक, जीवन संघर्षों से भरा रहा। ‘मुगल-ए-आजम’ की शूटिंग में बीमार पड़ने पर भी उन्होंने हार नहीं मानी।
36 साल की उम्र में 23 फरवरी 1969 को उनका स्वर्गवास हो गया। मधुबाला का जीवन सिखाता है कि सच्ची सफलता ग्लैमर में नहीं, बल्कि सिद्धांतों में बसती है। उनकी कहानी आज भी प्रेरणा देती है।