
फिल्मी दुनिया और फैशन जगत में जहां फिटनेस और खूबसूरती का बोलबाला है, वहां 50 साल की लीसा रे ने एक नया उदाहरण पेश किया है। उन्होंने बीच बॉडी की परंपरागत परिभाषा को चुनौती देते हुए इसे आत्म-सम्मान और आजादी से जोड़ा है। मुंबई की यह अभिनेत्री सोशल मीडिया पर अपनी बीच तस्वीरों के जरिए महिलाओं को नई सोच दे रही हैं।
बुधवार को इंस्टाग्राम पर साझा की गई तस्वीरों में लीसा ने सिंपल स्विमसूट में नजर आईं। कैप्शन में उन्होंने लिखा कि पहले बीच पर खूबसूरत लगने का मतलब था लाल स्विमसूट, गहरे होंठ और बेदाग त्वचा। 1991 के ग्लैडरैग्स कवर ने उन्हें इसी छवि में स्थापित किया था, जिस पर उनका करियर टिका। लेकिन अब समय बदल चुका है।
उन्होंने बताया कि जिंदगी ने कई उतार-चढ़ाव दिखाए। बीमारियों से जूझना पड़ा, खुद को संभाला। 90 के दशक में सनस्क्रीन का चलन कम था, इसलिए धूप की मार उनकी त्वचा पर नजर आती है। लेकिन यह उनकी कहानी का हिस्सा है, जिसे वे गर्व से अपनाती हैं। दूसरों की मंजूरी से ज्यादा खुद को कबूल करना उन्हें सुकून देता है।
लीसा ने हॉलीवुड की पामेला एंडरसन का उदाहरण दिया, जो लाल स्विमसूट की प्रतीक थीं लेकिन अब अपनी नई पहचान बना रही हैं। लीसा को ग्लैमर पसंद है, शूट्स और इवेंट्स में सजना अच्छा लगता है। लेकिन बीच पर वे पूरी तरह सहज और नेचुरल रहना चाहती हैं।
यह पोस्ट अभिनेत्रियों पर उम्र के साथ बढ़ते दबाव को चुनौती देती है। लीसा साबित कर रही हैं कि उम्र सिर्फ संख्या है, असली खूबसूरती आत्मविश्वास में बसती है। उनकी यह पहल महिलाओं के लिए प्रेरणा बनेगी।