
बॉलीवुड के प्रमुख फिल्म निर्माता करण जौहर ने ‘लापता लेडीज’ फिल्म को लेकर गहरी उदासी जताई है। किरण राव द्वारा निर्देशित इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज न होने पर वे बेहद दुखी हैं। आमिर खान प्रोडक्शंस की यह फिल्म नेटफ्लिक्स पर सीधे रिलीज हुई थी, जिसने राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर अपनी कला सिद्ध की।
हाल ही में एक प्रमोशनल इवेंट में जौहर ने कहा, ‘काश यह फिल्म सिनेमाघर में देख पाता।’ उनके शब्द बॉलीवुड में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभुत्व पर बहस छेड़ रहे हैं। थिएटर की चमक-दमक और दर्शकों की तालियां फिल्मों को नई जान देती हैं, ऐसा उनका मानना है।
फिल्म की कहानी दो दुल्हनों के ट्रेन में बदल जाने पर आधारित है, जो ग्रामीण भारत की सामाजिक कुरीतियों को हास्य और संवेदना से उजागर करती है। फूल और जया के किरदारों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण की बात उठाई गई है।
जौहर, जिनकी धर्मा प्रोडक्शंस ने ‘कभी खुशी कभी गम’ जैसी ब्लॉकबस्टर्स दी हैं, थिएट्रिकल एक्सपीरियंस को सर्वोच्च मानते हैं। उनका यह बयान उद्योग में एक नई चर्चा का सूत्रपात कर सकता है।
‘लापता लेडीज’ की डिजिटल सफलता निर्विवाद है, लेकिन जौहर का अफसोस सिनेमाई संस्कृति को बचाने की पुकार है। क्या भविष्य में ऐसी फिल्में थिएटर्स में लौटेंगी? यह सवाल बॉलीवुड के समक्ष खड़ा है।