
बॉलीवुड की अनकही दुनिया में कल्कि कोचलिन एक ऐसी अभिनेत्री हैं जिन्होंने हमेशा अपनी शर्तों पर जिया। ‘देव.डी’ में चंद्रमुखी बनीं से लेकर सिंगल मदर बनने तक का उनका सफर संघर्ष, साहस और स्वतंत्रता की मिसाल है।
2009 में रिलीज हुई ‘देव.डी’ ने कल्कि को घर-घर पहचान दी। अनुराग कश्यप की इस फिल्म में चंद्रमुखी का किरदार निभाते हुए उन्होंने अपनी कला का लोहा मनवाया। कामुकता और गरिमा के बीच उलझन वाली उसकी अदायगी ने समीक्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
फिर आईं एक के बाद एक चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं। ‘मार्गरिटा विद ए स्ट्रॉ’ में सेरेब्रल पाल्सी से ग्रस्त लड़की का किरदार हो या ‘क्वीन’ जैसी फिल्में, कल्कि ने हमेशा कुछ नया करने की कोशिश की। थिएटर से बॉलीवुड तक उनका सफर प्रेरणादायक रहा।
विवाह विच्छेद के बाद 2019 में बेटी साफो का जन्म हुआ। पार्टनर गाय डेविडी के साथ उन्होंने सिंगल मदरिंग चुनी। ‘मैं अपनी शर्तों पर मां बनी,’ उन्होंने कहा, समाज की रूढ़ियों को चुनौती देते हुए।
आज कल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर धूम मचा रही हैं। ‘सैक्रेड गेम्स’, ‘मेड इन हेवन’ जैसी सीरीज के अलावा वे कविता लिखती हैं, सामाजिक मुद्दों पर बोलती हैं। मानसिक स्वास्थ्य, बॉडी पॉजिटिविटी और महिलाओं के अधिकार उनकी प्राथमिकता हैं।
कल्कि कोचलिन साबित करती हैं कि जिंदगी का असली हीरो वही है जो अपनी कहानी खुद लिखे। उनका सफर हर महिला के लिए प्रेरणा है।
