
विश्व सिनेमा के पर्दे पर कबीर बेदी का नाम एक थ्रिलर हीरोइन की तरह चमकता है। लाहौर से मुंबई, इटली के समुद्री डाकू से जेम्स बॉन्ड के खलनायक तक, उनका करियर उतार-चढ़ावों से भरा है।
1946 में जन्मे कबीर का बचपन बंटवारे की आग में बीता। पिता लेखक, मां अंग्रेजी अध्यापिका। 1971 में ‘पवित्र पापी’ से बॉलीवुड में धमाल मचा दिया। ‘जवानी दिवानी’, ‘नागिन’ जैसी फिल्मों ने उन्हें स्टार बना दिया। लेकिन अंतरराष्ट्रीय पटल पर 1980 का ‘संदोकन’ टेलीसीरीज ने इतिहास रच दिया। इटली-जर्मन प्रोडक्शन में मलेशियन राजकुमार बने तो यूरोप में हंगामा मच गया।
हॉलीवुड में 1983 की ‘ऑक्टोपॉसी’ ने उन्हें गobinda के रूप में अमर कर दिया। रोजर मूर के बॉन्ड को हेलीकॉप्टर से चुनौती दी। ‘नाइट राइडर’, ‘डायनास्टी’ में नेगेटिव रोल्स ने पहचान बनाई। यूरोप में आर्ट फिल्में, भारत में ओटीटी शोज़।
निजी जिंदगी में चार शादियां, बेटे आदम की त्रासदी। फिर भी ‘स्टोरीज आई मस्ट टेल’ में सब खोल दिया। 77 की उम्र में भी सक्रिय। कबीर साबित करते हैं कि जुनून की कोई उम्र नहीं।