
भारतीय टेलीविजन के स्वर्णिम दौर में जसपाल भट्टी का नाम हंसी और व्यंग्य का प्रतीक बन गया। 3 मार्च 1955 को अमृतसर में जन्मे इस कलाकार ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर कॉमेडी की राह चुनी। नुक्कड़ नाटकों से शुरूआत कर वे दूरदर्शन के सितारे बने।
‘फ्लॉप शो’ और ‘उल्टा पुल्टा’ जैसे कार्यक्रमों में भट्टी ने भ्रष्टाचार, नौकरशाही और आम आदमी की मुश्किलों को इतने मजेदार ढंग से उकेरा कि दर्शक हंसते-हंसते सोचने लगे। पत्नी सविता के साथ बनाए इन शो में कोई आडंबर नहीं, सिर्फ साफ-सुथरा हास्य।
चंडीगढ़ के अखबार में कार्टूनिस्ट रह चुके भट्टी को जनमानस की परेशानियां अच्छी तरह पता थीं। 90 के दशक में ‘फ्लॉप शो’ ने धूम मचा दी। सरकारी दफ्तरों की पोल खोलने वाले स्केच आज भी प्रासंगिक हैं।
‘फुल टेंशन’, ‘हाय जिंदगी बाय जिंदगी’ जैसे अन्य शो भी लोकप्रिय हुए। फिल्मों में भी सक्रिय रहे—’माहौल ठीक है’ में कानून व्यवस्था पर कटाक्ष, ‘इकबाल’ और ‘कुछ मीठा हो जाए’ में अभिनय।
आम बोलचाल की भाषा में सिस्टम पर चोट करने का उनका अंदाज सभी को भाता था। 25 अक्टूबर 2012 को सड़क दुर्घटना में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके एपिसोड आज भी मुस्कान बिखेरते हैं। जसपाल भट्टी का योगदान अमर है।