
विश्व हिंदी दिवस पर हम हिंदी साहित्य के सिनेमा जगत में योगदान को याद करते हैं। कई उपन्यास क्लासिक फिल्मों का आधार बने, जो आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हैं।
हिंदी साहित्य ने बॉलीवुड को भावनाओं की गहराई दी। शरतचंद्र चट्टोपाध्याय का ‘देवदास’ फिल्मों में बार-बार जीया गया। बिमल रॉय और संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशकों ने इसे अमर बनाया। दिलीप कुमार से शाहरुख खान तक, हर दौर में इसकी कहानी ने दर्शाया प्यार का दर्द।
रामा नायक के ‘मृगनयनी’ पर बनी ‘मदर इंडिया’ नरगिस की अदाकारी से चमकी। गरीबी, बाढ़ और अन्याय के खिलाफ एक मां की लड़ाई ने दुनिया भर में ख्याति पाई। यह फिल्म हिंदी सिनेमा की पहचान बनी।
आर.के. नारायण के ‘गाइड’ को विजय आनंद ने देव आनंद के साथ परदे पर उतारा। प्रेम, मोह और आत्मज्ञान की यह गाथा दार्शनिक ऊंचाइयों को छूती है।
मिर्जा हादी रुस्वा के ‘उमराव जान’ में रेखा ने लखनवी तहजीब को जीवंत किया। गजलें और नृत्य इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं।
आज ‘3 इडियट्स’ जैसी फिल्में भी साहित्यिक प्रभाव दिखाती हैं। हिंदी दिवस पर ये अनुकूलन साहित्य की शक्ति का प्रमाण हैं।