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हर किरदार में गोविंद नामदेव की दमदार उपस्थिति

Lok Shakti
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|मनोरंजन|
September 2, 2026
हर किरदार में गोविंद नामदेव की दमदार उपस्थिति
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3 सितंबर 1950 को मध्यप्रदेश के सागर में जन्मे गोविंद नामदेव ने अपने जीवन को साधारण से लेकर भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार विलेन तक पहुँचाया। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 1977 में स्नातक किया और लगभग दो दशक तक दिल्ली के थियेटर में मंच जीवंत किया, जहाँ केतन मेहता और डेविड धवन जैसे दिग्गजों से मुलाकात हुई। 1992 में ‘शोला और शबनम’ में उनका पहला बड़ा फिल्म अवसर आया, पर असली पहचान 1994 की शेखर कपूर की ‘बैंडिट क्वीन’ में ठाकुर के किरदार से मिली। इसके बाद ‘विरासत’, ‘सत्या’, ‘सरफ़रोश’, ‘पुकार’, ‘लज्जा’, ‘कसम’ जैसी कई फिल्मों में उन्होंने नकारात्मक भूमिका को नया आयाम दिया। उन्होंने कभी हीरो बनने की लालसा नहीं रखी, बल्कि किरदार को ही हीरो बनाने पर भरोसा किया, जिसके कारण उन्हें कई पुरस्कार और मान्यताएँ मिलीं। आज भी, सत्तर की उम्र में वह OTT प्लेटफ़ॉर्म पर ‘अभय’, ‘द कश्मीर फ़ाइल्स’ जैसी वेब सीरीज में अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

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