
मनोरंजन जगत में फैंटेसी फिल्मों का बोलबाला हो गया है। निर्माता सूरज सिंह ने बताया कि आज के दर्शक पारंपरिक कहानियों से ऊब चुके हैं और जादुई दुनिया की ओर रुख कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव दर्शकों की भागदौड़ भरी जिंदगी से राहत पाने की चाहत से उपजा है।
फैंटेसी फिल्में न केवल रोमांच प्रदान करती हैं, बल्कि भावनात्मक गहराई भी रखती हैं। सिंह कहते हैं, ‘महामारी के बाद लोग ऐसी कहानियां चाहते हैं जो उन्हें वास्तविकता से दूर ले जाएं। सुपरहीरोज, जादूगर और पौराणिक प्राणियों वाली फिल्में इसी जरूरत को पूरा करती हैं।’
बॉक्स ऑफिस पर इनकी कामयाबी साफ दिखाई देती है। हालिया रिलीज ने रिकॉर्ड तोड़े हैं। परिवारों से लेकर युवाओं तक सभी इनके दीवाने हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी फैंटेसी कंटेंट सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
विशेष प्रभाव (वीएफएक्स) तकनीक ने इस жанр को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। सूरज सिंह ने अपनी कई फिल्मों में इसका बेहतरीन इस्तेमाल किया। वे कहते हैं, ‘भारतीय लोककथाओं को आधुनिक फैंटेसी के साथ जोड़कर हम वैश्विक स्तर पर टक्कर ले सकते हैं।’
भविष्य में यह тренд और मजबूत होगा। सिंह ने खुलासा किया कि वे नई परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। निर्देशक और लेखक भारतीय मिथकों को नए अंदाज में पेश कर रहे हैं। हालांकि, दोहराव से बचना जरूरी है।
कुल मिलाकर, फैंटेसी फिल्में सिनेमा की नई धारा बन चुकी हैं। सूरज सिंह का मानना है कि अच्छी स्क्रिप्ट और तकनीक से यह жанр लंबे समय तक राज करेगा। दर्शकों के दिलों पर इनका कब्जा पक्का हो चुका है।