
अभिनेत्री संदीपा धर की नई फिल्म ‘दो दीवाने शहर में’ ने न केवल दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि परफेक्शन की होड़ छोड़कर खुद को अपनाने का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया है। हाल ही में एक साक्षात्कार में संदीपा ने महिलाओं पर बढ़ते सौंदर्य दबाव पर चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि आज कॉस्मेटिक सर्जरी केवल अभिनेत्रियों तक महदूद नहीं रही। सामान्य युवतियां भी इन्हें करा रही हैं। पहले यह फिल्मी सितारों की शौकत समझी जाती थी, मगर अब यह आम हो गया। हर महिला अपनी जिंदगी की नायिका बनना चाहती है, लेकिन यदि यह आत्म-घृणा से प्रेरित हो तो घातक साबित होता है।
संदीपा ने कहा कि हम कृत्रिम सौंदर्य मापदंडों के पीछे भाग रहे हैं, जो वास्तविकता से कोसों दूर हैं। इससे स्वयं से असंतोष बढ़ता है। बदलाव की जरूरत है और यह तब संभव जब परिवार-मित्र हमें यथावत स्वीकार करें।
उन्होंने तुलना को प्रसन्नता का सबसे बड़ा शत्रु करार दिया। बचपन से माता-पिता या अध्यापक पढ़ाई-व्यवहार या रूप में तुलना करते रहे, जो असुरक्षा और आघात पैदा करता है क्योंकि प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है। सोशल मीडिया ने इसे और भयावह बना दिया।
लोग दूसरों की चमक देखकर स्वयं को कमतर समझते हैं, परंतु प्रत्येक का सफर अलग है। वांछित वस्तु हमेशा हमारे लिए उपयुक्त नहीं। हमें खुद को वैसा ही अपनाना चाहिए। सफलता के बारे में संदीपा बोलीं, ‘मेरी सफलता मन की शांति है। फिल्में सफल-असफल होती रहेंगी, लेकिन मैं प्रतिदिन स्वयं के साथ हूं। व्यक्तिगत विकास और जीवन उद्देश्य ही सार्थक हैं।’