
दक्षिण भारतीय सिनेमा की चमकती दुनिया में भानुप्रिया की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। एक समय स्कूल की होनहार छात्रा रही यह अभिनेत्री एक शर्मनाक घटना की वजह से अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो गई थी। लेकिन क्लासिकल डांस ने उनके जीवन को नई दिशा दी और उन्हें फिल्मों में एंट्री दिलाई।
तमिलनाडु के एक संगीतमय परिवार में जन्मी भानुप्रिया ने बचपन से ही भरतनाट्यम में महारत हासिल कर ली थी। उनके पिता एक प्रसिद्ध कर्नाटक संगीतकार थे। स्कूल की उस घटना ने उन्हें तोड़ दिया, लेकिन नृत्य ने उन्हें संभाला। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनके प्रदर्शन ने फिल्म निर्माताओं का ध्यान खींचा।
1980 के दशक में तमिल फिल्म ‘अग्नि नटराजम’ से वे रातोंरात स्टार बन गईं। मणि रत्नम के निर्देशन में उनके डांस नंबर्स ने धूम मचा दी। इसके बाद उन्होंने तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में 75 से अधिक फिल्में कीं। कन्नड़ में उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
भानुप्रिया का सफर आसान नहीं था। शादी, बच्चे और फिल्मों से ब्रेक के बावजूद वे लौटीं। आज वे डांस वर्कशॉप चलाती हैं और युवाओं को प्रेरित करती हैं। उनकी कहानी साबित करती है कि विपत्ति से उबरकर सफलता हासिल की जा सकती है। क्लासिकल आर्ट्स ने न सिर्फ फिल्मी करियर दिया बल्कि जीवन का संतुलन भी सिखाया।