
मुंबई के संगीत जगत पर शोक की छाया मंडरा रही है। 92 वर्षीय आशा भोसले का शनिवार रात ब्रीच कैंडी अस्पताल में हृदय और श्वास संबंधी जटिलताओं से निधन हो गया। ‘अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं’ जैसे अमर गीतों से सजाए भारतीय संगीत को उन्होंने सात दशक तक रोशन किया।
नौ साल की उम्र में 1943 में पहला फिल्मी गीत गाकर सफर शुरू करने वाली आशा ताई ने कैबरे से लेकर गजल, भजन तक हर विधा में कमाल दिखाया। बड़ी बहन लता मंगेशकर के बाद हिंदी सिनेमा की सबसे चहेती आवाज बनीं। ‘उमराव जान’ की गजलें आज भी गूंजती हैं।
‘हम दोनों’ फिल्म का वह गाना, देव आनंद-साधना पर फिल्माया गया, मोहम्मद रफी के साथ उनकी जोड़ी ने सुपरहिट बनाया। जयदेव का संगीत और साहिर लुधियानवी के बोल जुदाई की भावनाओं को खूबसूरती से उकेरते हैं। आज भी यूट्यूब-रेडियो पर बजता है।
रोमांटिक से लेकर चुलबुले, गंभीर गीतों तक—आशा की आवाज जादुई थी। रियलिटी शो में उन्होंने कहा था, गाते हुए ही जाना चाहूंगी। उनके हजारों गाने सदियों तक दिलों में बसे रहेंगे। बॉलीवुड और प्रशंसक श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

