
एआर रहमान के ‘कम्युनल’ बयान ने पूरे मनोरंजन जगत को हिला दिया है। राजनीति से लेकर बॉलीवुड और संतों तक सभी ने अपनी राय रखी है। अब पूर्व अभिनेत्री ममता कुलकर्णी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर चीज का समय होता है। नई पीढ़ी में धैर्य की कमी है। पुराने जमाने में सब एकजुट होकर काम करते थे, लेकिन अब संगीत निर्देशक भी पॉपकॉर्न चबाते नजर आते हैं। रहमान को तो खुश होना चाहिए कि मैं वहां होकर उन्हें निर्देश न दे रही हूं कि कौन सा काम करूं या गाना गाऊं।
90 के दशक की चहेती हीरोइन रहीं ममता ने दुबई में ध्यान के दौरान का किस्सा सुनाया। तब वे फिल्में देखना बंद कर चुकी थीं। एक ईसाई महिला ने ‘कमीने’ का जिक्र किया तो उन्होंने कहा, टाइटल ही इतना अश्लील है तो गाने कैसे होंगे? आज वे आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं, दूध-दही पर निर्भर।
बॉलीवुड में धर्म के नाम पर भेदभाव पर दुख जताते हुए ममता बोलीं, 90 का दशक स्वर्णिम था। आमिर घर आते थे, धर्म का सवाल ही नहीं उठता था। अब क्या हो गया? लोग धर्म देखकर बात करते हैं। कलाकार को सिर्फ कलाकार समझो, भेदभाव बंद करो।
शान, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा जैसे कलाकारों ने भी अपनी बात कही। शान ने कहा कि उन्हें काम न मिलने पर भी उन्होंने इसे निजी न लिया। यह विवाद बॉलीवुड की एकजुटता पर सवाल उठा रहा है।