
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने हाल ही में एक कार्यक्रम में अपनी जिंदगी और करियर के रोचक सफर को साझा किया। ग्रामोफोन की धुनों से लेकर स्पॉटिफाई की स्ट्रीमिंग तक, रेडियो के दौर से ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक, उन्होंने बताया कि कैसे उनकी पीढ़ी ने तकनीकी क्रांति को गले लगाया।
खेर ने बचपन की यादें ताजा कीं जब घर में ग्रामोफोन पर लता मंगेशकर और किशोर कुमार के गीत बजते थे। ‘एक रिकॉर्ड कई दिनों तक बजता रहता था,’ उन्होंने हंसते हुए कहा। रेडियो ने उन्हें अभिनय की पहली सीख दी, जहां अमीन सयानी जैसे नाम घर-घर मशहूर थे।
कैसेट, सीडी और फिर मोबाइल ऐप्स के आने से संगीत की दुनिया बदल गई। अनुपम खेर ने अपने करियर से जोड़ा कि कैसे वे थिएटर से फिल्मों और अब ओटीटी तक पहुंचे। ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्में और वेब सीरीज ने उन्हें नई ऊंचाइयां दीं।
उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि बदलते जमाने के साथ तालमेल बिठाएं लेकिन कहानी कहने का मूल मंत्र न भूलें। अनुपम खेर का यह सफर न सिर्फ नॉस्टैल्जिया जगाता है बल्कि प्रेरणा भी देता है।