
मुंबई के थिएटर जगत में अनुपम खेर का जलवा एक बार फिर देखने को मिला। रविवार रात उनके नाटक ‘कुछ भी हो सकता है’ ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शो से ठीक पहले पैर में तेज दर्द होने के बावजूद खेर ने जबरदस्त अभिनय किया।
अपने इंस्टाग्राम पर नाटक की झलकियां साझा करते हुए अनुपम ने बताया कि हर कदम दर्द भरा था, लेकिन स्टेज की लाइट्स जलते ही सब भूल गए। थिएटर की यह जादुई दुनिया फिल्मों से अलग है, जहां कोई छिपने की गुंजाइश नहीं। पूरी ईमानदारी से मौजूद रहना पड़ता है।
नाटक में उन्होंने अपनी जिंदगी के कड़वे पल साझा किए – असफलताएं, ठुकराहटें, आशंकाएं। यह उनके लिए थेरेपी सरीखा अनुभव था, जो शांति देता है और दूसरों को प्रेरणा भी। नाटक के अंत में मां का आना भावुक क्षण बना।
दर्शकों की तालियों को अनुपम ने अपनी ताकत बताया। ‘शो तो चलता रहना चाहिए’, उन्होंने कहा। थिएटर उनके अभिनय को निखारता है, जो फिल्मी करियर के बीच भी जरूरी है। ‘हर हर महादेव’ के जयकारे के साथ उन्होंने शुभकामनाएं दीं। यह प्रदर्शन साबित करता है कि जुनून दर्द पर भारी पड़ता है।