
मुंबई के जलसा बंगले पर हर रविवार को अमिताभ बच्चन अपने प्रशंसकों से मिलते हैं। यह परंपरा 40 वर्षों से जारी है, जो 1982 में फिल्म ‘कुली’ के सेट पर चोट लगने के बाद शुरू हुई थी। उस समय लाखों प्रशंसकों ने उनकी कुशलक्षेम के लिए प्रार्थना की थी।
पिछले रविवार को फैन मीट के बाद अमिताभ ने पिता हरिवंश राय बच्चन की कविता की पंक्तियां साझा कीं। फैंस ने इसे खूब सराहा और अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। इस प्यार से गदगद होकर अमिताभ ने एक्स पर लिखा, ‘फेसबुक पर आपके जवाब पढ़कर दिल भर आया। आपकी कुछ बातों ने पूज्य बाबूजी की महत्वपूर्ण कविता की याद दिलाई।’
उन्होंने ‘क्या करूं संवेदना लेकर तुम्हारी क्या करूं’ शीर्षक कविता के अंश लिखे: ‘कौन है जो दूसरों को दुख अपना दे सकेगा… तुम दुखी हो तो सुखी मैं, विश्व का अभिशाप भारी।’ फैंस ने कमेंट्स में कहा कि अमिताभ को मिट्टी भी दोबारा गढ़ नहीं सकती।
अमिताभ ने कविता के पीछे की प्रेरणा की कहानी जल्द बताने का वादा किया। हरिवंश राय बच्चन की ‘एकाकी कविताएं’ में ‘अब मत मेरा निर्माण करो’, ‘मूल्य दे सुख के क्षणों का’ जैसी रचनाएं विश्वविख्यात हैं।
यह घटना अमिताभ के सिनेमा और साहित्य के सेतु होने को रेखांकित करती है, जहां फैंस का स्नेह पिता की कविताओं को नई जिंदगी दे रहा है।