
मुंबई। हिंदी फिल्म जगत की उन चुनिंदा तस्वीरों में ‘एयरलिफ्ट’ का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है, जो इतिहास के खोए पन्नों को फिर से जीवंत कर देती है। अक्षय कुमार और निमरत कौर की यह फिल्म आज दस बरस की हो चुकी है।
इस खास दिन निमरत कौर ने सोशल मीडिया पर सेट की पुरानी तस्वीरें शेयर कीं। उन्होंने लिखा, ‘दस साल पहले आज यह जादू सिल्वर स्क्रीन पर उतरा था। संगीत, यादें और प्यार- सब समय के साथ गहरा होता गया।’ उनका यह संदेश फिल्म की ऐतिहासिकता को फिर से सुर्खियों में लाया।
1990 का वह काला दौर, जब सद्दाम हुसैन के इराक ने कुवैत पर कब्जा कर लिया। करीब 1.7 लाख भारतीय फंस गए थे। बमबारी, लूटपाट और मौत का साया मंडराने लगा। जान बचाना पहली प्राथमिकता बन गई।
भारत ने कमाल कर दिखाया। एयर इंडिया, सेना और सरकार ने मिलकर दुनिया का सबसे बड़ा नागरिक निकासी अभियान चलाया। 59 दिनों में 488 उड़ानों से सभी को सुरक्षित लाया गया। यह गिनीज रिकॉर्ड में दर्ज है।
फिल्म की कहानी रंजीत कात्याल (अक्षय कुमार) के इर्द-गिर्द बुनी गई है। कुवैत में ऐशोआराम की जिंदगी जीने वाले रंजीत की पत्नी अमृता (निमरत कौर) और बेटी हैं। शुरू में वह अपनों से बेपरवाह, लेकिन ड्राइवर की हत्या ने सब बदल दिया।
रंजीत ने हिम्मत जुटाई। इराकी अफसरों से सौदेबाजी, भीड़ को संभालना, प्लेनों की व्यवस्था- सब कुछ किया। फिल्म युद्ध के भयावह चित्रण के साथ भावुक मोड़ दिखाती है।
निर्देशक राजा कृष्णा मेनन ने वास्तविक घटनाओं पर आधारित यह कृति इतनी सशक्त बनाई कि दर्शक थिएटर से प्रेरित होकर निकले। अक्षय का अभिनय चरम पर, निमरत की संजीदगी लुभाती है।
दस साल बाद भी ‘एयरलिफ्ट’ प्रेरणा स्रोत है। यह सिखाती है कि संकट में एकजुटता ही सबसे बड़ा हथियार है। भारतीयता की यह गाथा अमर रहेगी।