
भारतीय महिलाएं निवेश के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इक्विरस वेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, पांच वर्षों में उनके पोर्टफोलियो में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का हिस्सा 10 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गया है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट का आवंटन 45 प्रतिशत से गिरकर महज 20 प्रतिशत रह गया।
पीएमएस और एआईएफ जैसी वैकल्पिक संपत्तियों की हिस्सेदारी भी 3 प्रतिशत से दोगुनी होकर 7 प्रतिशत पहुंच गई। बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान 75-90 प्रतिशत महिलाएं घबराहट में संपत्ति नहीं बेचतीं, बल्कि धैर्य रखती हैं।
लगभग 55 प्रतिशत महिलाएं गिरावट के समय चुनिंदा निवेश करती हैं, जो उनके बढ़ते आत्मविश्वास को दिखाता है। एआई टूल्स का उपयोग सीमित है—35-50 प्रतिशत महिलाएं इन्हें या तो अपनाती ही नहीं या केवल शिक्षा व निगरानी के लिए इस्तेमाल करती हैं।
यह रिपोर्ट 55,000 महिला निवेशकों और 100 से अधिक रिलेशनशिप मैनेजर्स के इनपुट पर आधारित है। महिलाएं अब फिक्स्ड डिपॉजिट, सोना या रियल एस्टेट से हटकर विविधीकृत, लक्ष्य-आधारित पोर्टफोलियो की ओर बढ़ रही हैं।
इक्विरस वेल्थ के एमडी-बिजनेस हेड अंकुर पुंज कहते हैं, ‘महिलाएं वित्तीय निर्णयों में जागरूक, आत्मविश्वासी और रणनीतिक हो रही हैं।’ एआई सहायक है, लेकिन अनुशासित प्रक्रिया और मानवीय विवेक ही निर्णय लेते हैं।
‘बकेट थिंकिंग’ लोकप्रिय हो रही है—सुरक्षा, वृद्धि, तरलता और विरासत जैसे लक्ष्यों पर आधारित पोर्टफोलियो। जोखिम की परिभाषा अब मुद्रास्फीति, लक्ष्य विफलता, निकासी समय और पारिवारिक शासन तक विस्तृत हो गई है।
यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, जहां महिलाएं धन सृजन की नई शक्ति बन रही हैं।