
पश्चिमी एशिया में अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। जवाब में ईरान ने इजरायल पर ड्रोन-मिसाइल हमले किए और बहरीन, कुवैत व कतर के अमेरिकी अड्डों को निशाना बनाया। संघर्ष बढ़ने के साथ वैश्विक निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गईं, जहां तेल-गैस जहाजों का आवागमन लगभग ठप हो चुका है।
ईरान और ओमान के बीच बसा यह संकरा रास्ता फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सबसे तंग जगह पर 33 किमी चौड़ा, टैंकर लेन मात्र 3-3 किमी। क्षेत्रीय जल होने पर भी अंतरराष्ट्रीय मार्ग, यूएई के करीब।
हमलों के बाद ईरान की चेतावनी से जहाज रुक गए। कुछ बाहर निकले, नए नहीं आए। ओमान तट पर छोटे टैंकर पर हमला, हमलावर अज्ञात। ऊर्जा बाजार में हड़कंप।
प्राचीन काल से व्यापार का केंद्र, आज सऊदी, ईरान, इराक आदि का तेल-एलएनजी एशिया भेजता। 20% वैश्विक तेल (2 करोड़ बैरल/दिन), कतर की पूरी गैस। पाइपलाइन सीमित विकल्प।
बंदी से कीमतें आसमान छूेंगी, पेट्रोल महंगा, महंगाई खासकर एशिया में। इतिहास: 1973 प्रतिबंध, 80 के दशक टैंकर युद्ध, 2012 धमकी, 2019 हमले।
अमेरिकी पांचवीं फ्लीट बहरीन से सुरक्षा, लेकिन युद्ध में जोखिम। बंद तो वैश्विक संकट। ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव में यह अर्थव्यवस्था की धमनी।