
देशभर के घरों में जनवरी महीने में बनी शाकाहारी थाली की कीमत में सालाना आधार पर एक प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जबकि मांसाहारी थाली का दाम सात प्रतिशत लुढ़क गया। क्रिसिल इंटेलिजेंस की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्याज, आलू और दालों की कीमतों में भारी गिरावट ने इस राहत का आधार तैयार किया।
रिपोर्ट में बताया गया कि प्याज की कीमतें 27 प्रतिशत घटीं, क्योंकि स्टॉक भरपूर होने के साथ निर्यात में कमी आई। आलू के दाम 23 प्रतिशत नीचे आए, जो पिछली फसल की कम उपज से बने ऊंचे आधार का असर था। दालों में औसतन 14 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसमें बंगाल चना का आयात नौ गुना, पीली मटर 85 प्रतिशत और काली चना 31 प्रतिशत बढ़ा।
इन आयातों को मार्च 2026 तक जारी रखने की मंजूरी मिली है। हालांकि, टमाटर ने राहत को सीमित रखा—इसकी कीमत 31 से बढ़कर 46 रुपये प्रति किलो हो गई, यानी 50 प्रतिशत उछाल। आवक में 39 प्रतिशत कमी इसका कारण रही।
वनस्पति तेल की कीमतें सोयाबीन की वैश्विक कमी से चार प्रतिशत बढ़ीं, जबकि एलपीजी सिलेंडर महंगे सात प्रतिशत हुए। क्रिसिल के पुष्पन शर्मा ने कहा, ‘प्याज, आलू व दालों की नरमी से शाकाहारी थाली सस्ती हुई, लेकिन टमाटर व ईंधन ने इसे अंकुशित किया।’ वित्त वर्ष में स्टॉक सुधार से भविष्य में और स्थिरता की उम्मीद है।