
विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब वैश्विक व्यापार का महज 2 प्रतिशत रह गया है, जो 2024 में 2.7 प्रतिशत था। गुरुवार को जारी डीएचएल ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट 2026 ने इस गिरावट को रेखांकित किया है, जो भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफों के बावजूद वैश्विक एकीकरण की मजबूती को दर्शाती है।
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस के सहयोग से तैयार यह रिपोर्ट बताती है कि 2015 में दोनों देशों का व्यापार वैश्विक स्तर पर 3.6 प्रतिशत तक पहुंचा था, लेकिन हाल के वर्षों में यह लगातार घटता चला गया। 2025 की पहली तीन तिमाहियों में यह 2 प्रतिशत के आसपास सिमट गया।
दोनों के बीच सीमा-पार निवेश प्रवाह तो और भी न्यून है, जो वैश्विक निवेश का 1 प्रतिशत से कम है। फिर भी, वैश्विक कनेक्टेडनेस सूचकांक 2025 में 25 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जो 2022 के रिकॉर्ड के बराबर है। यह 0-100 के पैमाने पर व्यापार, पूंजी, सूचना और लोगों के प्रवाह को नापता है।
डीएचएल एक्सप्रेस के सीईओ जॉन पियर्सन ने कहा कि अनिश्चितता के दौर में भी देश और कंपनियां अंतरराष्ट्रीय संबंध बनाए रखने में सक्षम हैं। उन्होंने गरीबी और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के लिए वैश्विक सहयोग की वकालत की।
कोविड के अपवाद को छोड़ें तो 2025 में वैश्विक व्यापार वृद्धि 2017 के बाद सबसे तेज रही, जिसमें अमेरिकी टैरिफ वृद्धि से पहले की शिपमेंट और एआई उत्पादों की मांग प्रमुख रही। विश्व व्यापार संगठन के अनुसार, एआई वस्तुओं ने 2025 की शुरुआती तिमाहियों में व्यापार वृद्धि का 42 प्रतिशत योगदान दिया।
रिपोर्ट का अनुमान है कि 2029 तक वस्तु व्यापार में सालाना औसतन 2.6 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जो पिछले दशक के अनुरूप है। अमेरिका-चीन संबंध कमजोर होने के बावजूद, वैश्विक अर्थव्यवस्था की जड़ें गहरी बनी हुई हैं।