
अगरतला। त्रिपुरा में पिछले सात वर्षों में फूलों की खेती में जबरदस्त उछाल आया है, जिसका फायदा राज्य के 59,000 से ज्यादा किसानों को मिला है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने वेस्ट त्रिपुरा के विवेकानंद फ्लावर गार्डन के उद्घाटन के बाद यह जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि फूल हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का अभिन्न अंग हैं। त्रिपुरा की उपजाऊ भूमि और भरपूर बारिश इसे फ्लोरिकल्चर के लिए आदर्श बनाती है। पहले फूल केवल सजावट के लिए उगाए जाते थे, लेकिन अब यह किसानों की कमाई का बड़ा स्रोत बन चुका है।
बारजला के सेनतु भौमिक सालाना 8 लाख, कांचनमाला के प्रदीप सरकार 12 लाख तथा चांदीबाड़ी के जयंत दै और बैखोड़ा के इंद्रजीत देबनाथ 8-9 लाख रुपये कमा रहे हैं। 2018 से पहले 2,738 कनि भूमि पर फूलों की खेती होती थी, जो अब बढ़कर 11,720 कनि हो गई।
किसानों की संख्या 2,190 से 59,100 और उत्पादन 1,117 मीट्रिक टन से 2,704 मीट्रिक टन हो गया। अब 89 प्रतिशत मांग स्थानीय उत्पादन से पूरी हो रही है। संरक्षित खेती की इकाइयां 225 से 504 हो गईं, जो कुल उत्पादन का 43 प्रतिशत है।
कृषि सबसे सम्मानजनक व्यवसाय है, मंत्री ने कहा। फूल सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं और जीवन को सुंदर बनाते हैं। यह क्रांति त्रिपुरा के ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।