
जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में बार-बार हो रही बढ़ोतरी पर गहरी चिंता जताई है। उनके अनुसार, यह बढ़ता टैक्स शेयर बाजार की ट्रेडिंग गतिविधियों को धीरे-धीरे कम कर रहा है, जिसका सीधा नुकसान सरकार की आय को हो रहा है।
सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में कामथ ने बताया कि एसटीटी की शुरुआत तब हुई थी जब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (एलटीसीजी) को समाप्त कर दिया गया था। लेकिन एलटीसीजी के दोबारा लागू होने के बावजूद हर बजट में एसटीटी बढ़ाया जाता रहा। बाजार के एक सक्रिय खिलाड़ी के रूप में वे हर बजट से एसटीटी में कटौती की उम्मीद करते हैं, मगर हर बार निराशा ही हाथ लगती है।
बजट 2024 में फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) पर एसटीटी में 60 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी की गई। फ्यूचर्स पर यह 0.0125 प्रतिशत से 0.02 प्रतिशत हो गया, जबकि ऑप्शंस पर 0.0625 प्रतिशत से बढ़कर 0.1 प्रतिशत पहुंच गया। उस समय बाजार की तेजी ने प्रभाव को छिपा लिया, लेकिन पिछले एक साल में बाजार के शांत होने पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में भारी गिरावट दर्ज की गई।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने एसटीटी से 78,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था। लेकिन 11 जनवरी तक मात्र 45,000 करोड़ रुपये ही एकत्र हो सके। मार्च अंत तक यदि 12,000 करोड़ और मिल भी जाएं तो कुल 57,000 करोड़ ही होंगे, जो लक्ष्य से 25 प्रतिशत कम है।
कामथ का मानना है कि यदि 2024 में एसटीटी न बढ़ाया जाता तो सरकार को कहीं अधिक राशि प्राप्त हो सकती थी। यह टिप्पणी नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा संकेत है कि अत्यधिक कर से बाजार की जान पर बन आई है।