
नई दिल्ली। भारतीय इस्पात उद्योग के एक युग का अंत हो गया है। बुधवार को दिग्गज उद्योगपति जतिंदर मेहरा का निधन हो गया, जिससे धातु और खनन क्षेत्र में शोक की व्यापक लहर दौड़ गई।
छह दशकों से अधिक समय तक चले उनके करियर में मेहरा ने अपनी तकनीकी विशेषज्ञता और दूरदर्शी रणनीतियों से कई बड़े प्रोजेक्ट्स को सफल बनाया। वे हमेशा महत्वाकांक्षी योजनाओं को हकीकत में बदलने के लिए जाने जाते रहे।
एस्सार समूह में धातु एवं खनन प्रभाग के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने इस्पात व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हजीरा की महत्वपूर्ण परियोजनाओं से लेकर ओडिशा के पारादीप इस्पात संयंत्र तक, उनके नेतृत्व में एस्सार ने वैश्विक बाजार में मजबूत कदम जमाया।
समूह ने शोक संदेश में उन्हें एक प्रेरणास्रोत बताया, जिनकी स्पष्ट सोच और समर्पण ने संगठन की प्रमुख उपलब्धियों को आकार दिया। ‘हमारे लिए यह अपूरणीय क्षति है। उनकी विरासत हमेशा हमें प्रेरित करेगी,’ कंपनी ने कहा।
एस्सार से पहले उन्होंने सार्वजनिक क्षेत्र में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया में कार्यकारी निदेशक और राष्ट्रीय इस्पात निगम के चेयरमैन-मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में विशाखापत्तनम इस्पात संयंत्र को चालू करने का नेतृत्व किया, जो देश के लिए ऐतिहासिक क्षण था।
2022 में भारतीय इस्पात संघ ने उन्हें लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया। सहकर्मी उन्हें मार्गदर्शक मानते थे, जिन्होंने अनुशासन और प्रेरणा से कई पीढ़ियों को तैयार किया।
मेहरा के जाने से उद्योग जगत ने एक महान व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी स्मृति में पूरे सेक्टर में श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है, जो भारत के औद्योगिक विकास की नींव मजबूत करने वाले योद्धाओं की याद दिलाती है।