
भारत के स्पेस सेक्टर में ऐतिहासिक क्षण आ गया है। हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने 60 मिलियन डॉलर (करीब 570 करोड़ रुपये) की फंडिंग हासिल कर ली है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन 1.1 अरब डॉलर हो गई और यह देश की पहली स्पेस-टेक यूनिकॉर्न बन गई।
यह फंडिंग राउंड 2023 की 519 मिलियन डॉलर वैल्यूएशन से लगभग चार गुना ज्यादा है। इससे भारत के निजी स्पेस उद्योग की तेज प्रगति का पता चलता है, जो वैश्विक स्तर पर अपनी छाप छोड़ रहा है।
जब किसी स्टार्टअप की वैल्यू एक अरब डॉलर से ऊपर जाती है, तो उसे यूनिकॉर्न कहा जाता है। भारत में विभिन्न क्षेत्रों से 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न हैं, लेकिन स्पेस में स्काईरूट पहली है।
कंपनी के सह-संस्थापक व सीईओ पवन कुमार चंदना ने कहा, ‘विक्रम-1 लॉन्च के लिए हम बेहद उत्साहित हैं। यह भारत का पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट है, जो देश व दुनिया के स्पेस क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित होगा। यह निवेश दुनिया के शीर्ष निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।’
इस राउंड में जीआईसी व ब्लैकरॉक जैसे वैश्विक निवेशक शामिल हुए, जो भारत के स्पेस सेक्टर में विदेशी रुचि को दिखाता है। कुल फंडिंग अब 160 मिलियन डॉलर पर पहुंच गई है।
2023 में एक ऑर्बिटल लॉन्च के बाद, कंपनी जल्द ही दूसरा लॉन्च करने की तैयारी में है। नई पूंजी से विक्रम-1 लॉन्च तेज होंगे, उत्पादन बढ़ेगा और विक्रम-2—एक 1 टन क्षमता वाला क्रायोजेनिक लॉन्च व्हीकल—विकसित होगा। इससे मिशनों व ग्राहकों की सेवा में विस्तार होगा।
स्काईरूट की यह सफलता भारत को स्पेस सुपरपावर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
