
दिल्ली की प्रमुख एयर फ्रेट कंपनी स्काईवेज एयर सर्विसेज लिमिटेड पर अब धोखाधड़ी का गंभीर आरोप लगा है। यूनाइटेड किंगडम की पीजी पेपर कंपनी ने आर्थिक अपराध शाखा में 480 करोड़ रुपये के फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें स्काईवेज समेत नौ कंपनियां नामित हैं।
यह मामला तब उजागर हुआ जब पीजी पेपर ने दिल्ली की आरपीके कंसल्टेंट्स को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के लिए नियुक्त किया। आरपीके के तत्कालीन ग्लोबल फ्रेट प्रोक्योरमेंट मैनेजर लोकेश चोपड़ा ने कथित तौर पर स्काईवेज और उसकी सहायक कंपनियों ब्रेज पोर्ट लॉजिस्टिक्स व स्काईवेज एयरवेज का परिचय कराया।
एफआईआर के अनुसार, चोपड़ा ने विश्वासघात किया और इन कंपनियों के निदेशकों से सांठगांठ कर शिपमेंट में हेरफेर किया। परिणामस्वरूप अत्यधिक दरों पर सेवाएं ली गईं, जिससे पीजी पेपर को भारी नुकसान हुआ। इसमें मिलीभगत, रिश्वत, गबन और सबूत नष्ट करने जैसे कदाचार शामिल बताए गए हैं।
स्काईवेज ने सफाई दी कि डीआरएचपी दाखिल करते समय यह एफआईआर मौजूद नहीं थी। कंपनी ने कहा, ‘आरएचपी में इसका उल्लेख होगा। मामला अदालत में विचाराधीन है और हम कानूनी कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।’ हाल ही में कंपनी ने 48.23 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसका असर नए इश्यू पर पड़ेगा।
यह घटना लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में पारदर्शिता की जरूरत को रेखांकित करती है। आईपीओ की राह में स्काईवेज के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। जांच एजेंसियों की कार्रवाई से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।