
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वे ग्राहकों को बीमा जैसे उत्पादों की जबरन बिक्री (मिस-सेलिंग) बंद करें और लोन व जमाओं जैसे मूल कार्यों पर केंद्रित रहें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मिस-सेलिंग अपराध है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बजट के बाद आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड के साथ बैठक के उपरांत आयोजित प्रेस वार्ता में सीतारमण ने बताया कि वे लंबे समय से इस समस्या को उजागर करती आ रही हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि यदि कोई व्यक्ति घरेलू ऋण के लिए आता है और उसके पास पर्याप्त गिरवी संपत्ति है, तो उसे अतिरिक्त बीमा खरीदने के लिए दबाव नहीं डालना चाहिए।
उन्हें प्रसन्नता हुई कि आरबीआई ने बैंकों को मिस-सेलिंग पर सख्ती के आदेश जारी किए हैं। बैंकों को अपना लाभ चालू एवं बचत खातों (सीएएसए) से जुटाई गई जमाओं तथा ऋण वितरण से कमाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीएएसए जमाओं को बढ़ावा देना बैंकों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
पहले जब बैंकों ने अतिरिक्त पूंजी की मांग की थी, तब सीतारमण ने उन्हें सीएएसए के जरिए संसाधन जुटाने का सुझाव दिया था। अमेरिका के हालिया टैरिफ बदलावों पर उन्होंने कहा कि प्रभाव का आकलन समय से पहले करना उचित नहीं। वाणिज्य मंत्रालय हालात की पड़ताल कर रहा है तथा व्यापारिक चर्चाओं पर प्रतिनिधिमंडल फैसला लेगा। अमेरिका ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए 15 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है, जिससे भारत प्रभावित है। भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार pact की बैठक टाल दी गई।
सीतारमण ने भारत के ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएई, कतर, ओमान, ईयू एवं ब्रिटेन के साथ हुए समझौतों का जिक्र करते हुए कहा कि देश वैश्विक व्यापार से जुड़कर अर्थव्यवस्था को बलवान बनाएगा। सोने की कीमतों पर बोलते हुए उन्होंने वैश्विक केंद्रीय बैंक खरीद को जिम्मेदार ठहराया। भारतीय परिवारों में सोना प्रिय निवेश है, विशेषकर त्योहारों में। सरकार एवं आरबीआई निगरानी में हैं, वृद्धि चिंताजनक नहीं।