
मुंबई के शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट का दौर चला, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी 11 महीनों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। दोपहर एक बजे तक सेंसेक्स में 1,750 अंकों या 2.22 प्रतिशत की कमी के साथ यह 77,170 पर और निफ्टी में 540 अंकों या 2.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,910 पर कारोबार कर रहा था।
इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी को माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड सोमवार को 26 प्रतिशत तक उछलकर 119 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जुलाई 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। बाद में कुछ कमी आई और यह 14.42 प्रतिशत की बढ़त के साथ 106 डॉलर पर स्थिर हुआ। ईराक और कुवैत जैसे देशों द्वारा उत्पादन में कटौती तथा कतर की पिछली एलएनजी उत्पादन घटाने की घोषणा ने सप्लाई को प्रभावित किया है।
वैश्विक बाजारों की कमजोरी ने भी भारतीय बाजार को झकझोर दिया। एशियाई बाजारों जैसे टोक्यो, शंघाई, सोल, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता सभी लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को भी नुकसान में बंद हुए थे।
डॉलर की मजबूती ने रुपये को कमजोर किया है। डॉलर इंडेक्स इस साल के उच्चतम स्तर 99.7 पर पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी की निकासी बढ़ गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को इक्विटी में 6,030.38 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
यह गिरावट तेल संकट, वैश्विक अनिश्चितता और एफआईआई बिकवाली का परिणाम है। निवेशक अब केंद्रीय बैंकों की प्रतिक्रिया और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।