
गुवाहाटी के लाचित घाट पर गुरुवार को एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ब्रह्मपुत्र नदी पर चार नदी प्रकाशस्तंभों की आधारशिला रखी। यह भारत के अंतर्देशीय जलमार्गों पर प्रकाशस्तंभ स्थापना का प्रथम प्रयास है, जो राष्ट्रीय जलमार्ग-2 पर नौवहन को अभूतपूर्व मजबूती प्रदान करेगा।
प्रकाशस्तंभ एवं प्रकाश जहाज महानिदेशालय (डीजीएलएल) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्ल्यूएआई) के संयुक्त आयोजन में हुए इस समारोह में मंत्री ने इन संरचनाओं को देश की नदी अर्थव्यवस्था का नया अध्याय बताया। ये प्रकाशस्तंभ डिब्रूगढ़ के बोगीबील, कामरूप (मेट्रो) के पांडू, नागांव के सिलघाट (दक्षिणी तट) तथा बिश्वनाथ के बिश्वनाथ घाट (उत्तरी तट) पर बनेंगे। कुल लागत 84 करोड़ रुपये है।
प्रत्येक 20 मीटर ऊंचा प्रकाशस्तंभ 14 समुद्री मील की भौगोलिक और 8-10 समुद्री मील की प्रकाशीय सीमा वाला होगा, जो पूर्णतः सौर ऊर्जा से चलेगा। मौसम निगरानी सेंटरों सहित ये 24 घंटे सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करेंगे।
विशेष बात यह है कि प्रत्येक स्थान पर संग्रहालय, एम्फीथिएटर, कैफेटेरिया, बाल उद्यान, स्मृति चिन्ह दुकानें और सार्वजनिक पार्क विकसित होंगे, जो इन्हें पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेंगे। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एनडब्ल्यू-2 पर 53 प्रतिशत माल ढुलाई वृद्धि के बीच असम के चाय, कोयला व उर्वरक क्षेत्रों को लाभ मिलेगा।
मंत्री सोनोवाल ने कहा, ‘पीएम मोदी के नेतृत्व में जलमार्ग सड़क-रेल का पूरक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का शक्तिशाली इंजन बन रहे हैं। जलमार्ग सस्ता, प्रदूषणरहित और राजमार्गों को मुक्त रखता है। ये प्रकाशस्तंभ ब्रह्मपुत्र को 24×7 व्यापार के लिए तैयार करते हैं।’
समारोह में असम के पर्यटन मंत्री रणजीत दास, परिवहन मंत्री चरण बोरो, लोक स्वास्थ्य मंत्री जयंता मल्लाबरुआ, सांसद बिजुली कलिता मेधी, विधायक सिद्धार्थ भट्टाचार्य उपस्थित रहे। मंत्रालय के सचिव विजय कुमार और डीजीएलएल महानिदेशक एन. मुरुगनंदम भी मौजूद थे। यह कदम नदी आधारित विकास की नई दिशा तय करता है।