
हैदराबाद में बुधवार से शुरू हो रहे विंग्स इंडिया 2026 में रूसी विमान कंपनियां अपनी ताकत दिखाने को तैयार हैं। इल्यूशिन IL-114-300 और सुपरजेट SJ-100 को प्रदर्शित कर रूस भारत के तेजी से बढ़ते क्षेत्रीय विमानन क्षेत्र में पश्चिमी दिग्गजों को चुनौती देगा।
भारत सरकार के टियर-2 और टियर-3 शहरों में एयरपोर्ट विकसित करने के प्रयास से छोटे विमानों की मांग आसमान छू रही है। 68 सीटर IL-114-300 छोटे रनवे और कठिन परिस्थितियों के लिए तैयार है, जो ATR 72-600 और डैश-8 जैसे विमानों का मुकाबला करेगा। बड़े उत्पादन पर इसकी कीमत 20-35 मिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
87-98 सीटों वाला SJ-100 क्षेत्रीय जेट बाजार के प्रीमियम सेगमेंट पर निशाना साधेगा, एम्ब्रेयर ई-जेट्स से टक्कर लेते हुए 30-36 मिलियन डॉलर कीमत पर। लेकिन असली खेल तो स्थानीय निर्माण, असेंबली और आपूर्ति श्रृंखला के प्रस्तावों में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी इंजीनियरिंग, रखरखाव और विनिर्माण में हजारों नौकरियां पैदा करेगी। विमान के 25-30 साल के जीवनकाल में स्पेयर पार्ट्स, ट्रेनिंग और ओवरहाल से अधिकांश मूल्य आएगा।
विंग्स इंडिया 2026 रूस-भारत विमानन सहयोग का नया दौर शुरू कर सकता है, जो आत्मनिर्भर भारत को मजबूत बनाएगा।