
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान के साथ चल रहे तनाव ने भारत की अर्थव्यवस्था पर साया तान लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं।
स्विट्जरलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में गवर्नर ने कहा कि ऊर्जा मूल्यों में उछाल महंगाई नियंत्रण के लिए बड़ी चुनौती है। आरबीआई को अपनी नीतियों में बदलाव करने पड़ सकते हैं। छह जून को होने वाली मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों पर फैसला होगा, जहां फिलहाल कोई परिवर्तन नहीं किया गया है ताकि आर्थिक विकास को बल मिले।
गवर्नर ने संकेत दिया कि खुदरा ईंधन मूल्यवृद्धि बस समय की बात है। इससे परिवहन खर्च और समग्र महंगाई बढ़ेगी। भारत अपनी 88 प्रतिशत कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है, इसलिए वैश्विक मूल्यवृद्धि का असर सीधा पड़ता है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, जिससे तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा। अंडर रिकवरी 1.98 लाख करोड़ तक पहुंच गई है।
फिर भी, आपूर्ति मजबूत है। एलपीजी उत्पादन 35,000 टन से बढ़ाकर 55,000-56,000 टन प्रतिदिन किया गया। 76 दिनों का कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है। सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई, लेकिन कंपनियों को नुकसान सहना पड़ रहा।
आरबीआई डेटा आधारित नीतियों पर जोर दे रहा है। यदि झटका अस्थायी तो नजरअंदाज, अन्यथा कार्रवाई। यह रणनीति भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं से बचाएगी।
