
नई दिल्ली में सोमवार को भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट संकेत दिए कि प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स और ब्रोकरों को दिए जाने वाले बैंक ऋणों से जुड़े हालिया नियमों में कोई परिवर्तन की योजना नहीं है। बोर्ड बैठक के बाद आयोजित प्रेस वार्ता में यह बात कही गई।
इस माह की शुरुआत में जारी इन दिशानिर्देशों ने ब्रोकरों के लिए बैंक गारंटी पर सख्त गिरवी शर्तें लगाई हैं और बैंकों को प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए ब्रोकरों को कर्ज देने से रोक दिया है। ये नियम एक अप्रैल से अमल में आएंगे, जो वित्तीय जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से बनाए गए हैं।
नियमों के लागू होने के बाद ब्रोकरेज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बाजार में आशंका है कि इससे ब्रोकरों की कमाई प्रभावित होगी और ट्रेडिंग की मात्रा कम हो सकती है। ब्रोकर समुदाय ने सेबी को पत्र लिखकर नियमों की पुनर्समीक्षा की मांग की है।
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि ये प्रावधान व्यापक चर्चाओं के बाद तय किए गए हैं। उन्होंने दो टूक कहा, ‘इनमें कोई बदलाव विचाराधीन नहीं है।’
मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ढांचे पर आरबीआई की सिफारिशें सरकार को भेज दी गई हैं, जिनकी समीक्षा मार्च अंत तक होगी। चार प्रतिशत खुदरा महंगाई का लक्ष्य (दो से छह प्रतिशत दायरे में) बरकरार रहेगा।
हालिया सीपीआई गणना में खाद्य वस्तुओं का वेटेज घटाने से महंगाई नीति पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, गवर्नर ने आश्वासन दिया। यह रुख वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।