
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को जोर देकर कहा कि भारत के आर्थिक लक्ष्यों को साकार करने के लिए विनिर्माण और निर्यात में गुणवत्ता को मूल तत्व बनाना अनिवार्य है। डीपीआईटी और क्यूसीआई द्वारा आयोजित प्रथम राष्ट्रीय गुणवत्ता सम्मेलन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित करते हुए गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट’ दृष्टिकोण को अमृत काल में विकास का मार्गदर्शक बताया।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना इसी सोच से ही पूरा होगा। भारत केवल खरीदार देश नहीं रह सकता, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का वैश्विक केंद्र बनेगा। ‘ब्रांड इंडिया विश्वास और उत्कृष्टता का प्रतीक बने।’
अगले 6-7 वर्षों में 2 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य हासिल करने के लिए उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर खरा उतरना होगा। गोयल ने बताया कि हाल के वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ 9 मुक्त व्यापार समझौते हुए हैं, जो वैश्विक जीडीपी के दो-तिहाई को आच्छादित करते हैं।
वस्त्र, चमड़ा, जूते और दवा क्षेत्रों में नए द्वार खुल रहे हैं, लेकिन लाभ के लिए गुणवत्ता अटल रहनी चाहिए। श्रम आधारित क्षेत्रों में क्षमता होने पर भी वैश्विक व्यापार में हिस्सेदारी कम है। उद्योगपतियों से अपील की कि घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता निर्यात स्तर की हो।
पहले ‘एक्सपोर्ट क्वालिटी’ की मांग होती थी, अब दोहरी व्यवस्था समाप्त कर एकसमान मानक अपनाएं। यह बदलाव भारत को वैश्विक पटल पर मजबूत बनाएगा।