
म्यूचुअल फंड आज निवेश का सबसे पसंदीदा माध्यम बन चुके हैं। सरल प्रक्रिया और बेहतर रिटर्न की संभावना से लाखों लोग इसमें निवेश कर रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक्सपेंस रेशियो आपकी कमाई को कैसे प्रभावित करता है? यह छोटा सा प्रतिशत लंबे समय में बड़ा खेल बदल सकता है।
एसेट मैनेजमेंट कंपनियां फंड चलाने के लिए कई खर्च उठाती हैं। फंड मैनेजर की सैलरी, ब्रोकरेज फीस, ट्रांजेक्शन कॉस्ट, एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च, मार्केटिंग, रजिस्ट्रार-कस्टोडियन शुल्क और ऑडिट फीस शामिल हैं। इन्हें जोड़कर टोटल एक्सपेंस रेशियो (टीईआर) बनता है, जो फंड की कुल संपत्ति का प्रतिशत होता है। यह रोजाना एनएवी से कटता है।
टीईआर की गणना कुल खर्च को एयूएम से भाग देकर 100 से गुणा करने पर होती है। सेबी ने इसकी ऊपरी सीमा तय की है। छोटे इक्विटी फंड में 2.25% तक, बड़े फंड में 1% के आसपास। डेट और पैसिव फंड में यह और कम।
डायरेक्ट प्लान चुनें, जहां कमीशन नहीं लगता और टीईआर कम रहता है। उदाहरणस्वरूप, 10 लाख रुपये 30 साल के लिए 12% रिटर्न पर डायरेक्ट में 3 करोड़ बन सकते हैं, लेकिन 0.5% ज्यादा खर्च से लाखों का नुकसान।
कम टीईआर ही सबकुछ नहीं। फंड का ट्रैक रिकॉर्ड, रिस्क, पोर्टफोलियो और मैनेजर का तजुर्बा भी जांचें। समझदारी से चुनाव करें तो एक्सपेंस रेशियो आपके लक्ष्यों को साकार करेगा।