
वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत हो रही है। प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अपनी नई रिपोर्ट में भारत को उभरते बाजारों में शीर्ष स्थान प्रदान किया है। एजेंसी के अनुसार, देश के विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और नीतिगत स्थिरता इसे अन्य अर्थव्यवस्थाओं से कई कदम आगे रखती है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत वैश्विक संकटों का सामना करने के लिए अन्य विकासशील देशों की अपेक्षा कहीं बेहतर स्थिति में है। तीन प्रमुख आधार—भारी विदेशी भंडार, स्थिर नीतियां और गहरा घरेलू पूंजी बाजार—इनकी वजह से बाहरी फंडिंग पर निर्भरता न्यूनतम है।
2020 से उभरते बाजार लगातार चुनौतियों से जूझ रहे हैं। कोविड-19, तेल मूल्य वृद्धि से महंगाई, अमेरिकी फेड के ब्याज दरों में इजाफा, बैंकिंग संकट और नए टैरिफ—इन सबके बीच भारत ने फंडिंग लागत में उछाल या बाजार पहुंच में रुकावट के बिना मुश्किलें पार कीं।
मौद्रिक नीति का स्पष्ट ढांचा, नियंत्रित महंगाई अपेक्षाएं और लचीली विनिमय दर निवेशकों का भरोसा बनाए रखती हैं। यह संयोजन बाहरी दबावों में भी स्थिरता प्रदान करता है।
भविष्य के वैश्विक तनावों के लिए भारत न केवल मजबूत बल्कि त्वरित उपायों से लैस है। तेजी से बदलते बाजारों में यह अंतर महत्वपूर्ण साबित होगा।
इंडोनेशिया, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से तुलना में भारत की श्रेष्ठता साफ झलकती है, जो इसे उभरते बाजारों का नेतृत्व प्रदान करती है।
