
मुंबई के शेयर बाजार पर मध्य पूर्व के बढ़ते तनाव का गहरा असर पड़ा है। देश की प्रमुख इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) का मार्केट कैपिटलाइजेशन 45,629.03 करोड़ रुपये की भारी गिरावट के साथ 5,43,208.36 करोड़ रुपये रह गया। इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत उपस्थिति ने इसे सबसे अधिक प्रभावित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में चल रहे प्रोजेक्ट्स पर संघर्ष का सीधा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे देरी और अतिरिक्त खर्च की आशंका है। निवेशकों ने जोखिम से बचने के लिए तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।
इस सप्ताह शीर्ष 10 कंपनियों में से आठ ने कुल 2,81,581.53 करोड़ रुपये का नुकसान झेला। एसबीआई का मार्केट कैप 53,952.96 करोड़ घटकर 10,55,567.27 करोड़, आईसीआईसीआई बैंक का 46,936.82 करोड़ कम होकर 9,40,049.82 करोड़, एचडीएफसी बैंक का 46,552.3 करोड़ गिरकर 13,19,107.08 करोड़ रह गया।
बजाज फाइनेंस 28,934.56 करोड़, टीसीएस 28,492.44 करोड़, एचयूएल 26,350.67 करोड़ और भारती एयरटेल 4,732.75 करोड़ रुपये के नुकसान के बाद क्रमशः 5,91,136.03 करोड़, 9,25,380.15 करोड़, 5,23,042.51 करोड़ तथा 10,67,120.50 करोड़ पर आ गए।
वहीं, रिलायंस इंडस्ट्रीज 14,750.39 करोड़ और इन्फोसिस 3,459.99 करोड़ की बढ़त के साथ 19,01,583.05 करोड़ तथा 5,30,546.54 करोड़ पर पहुंचे।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने कहा कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के दामों में उछाल से बाजार छोटे सप्ताह में भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। निवेशकों का भरोसा डगमगाया है।
यह घटना भारतीय कंपनियों को क्षेत्रीय जोखिमों पर पुनर्विचार करने का संकेत देती है। बाजार की अस्थिरता बनी रहेगी जब तक स्थिति स्पष्ट न हो।