
बेंगलुरु की सड़कों पर बाइक टैक्सी सेवाओं को नई जिंदगी मिली है। कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य में इन सेवाओं पर लगे प्रतिबंध को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश विभू बखरू और न्यायमूर्ति सीएम जोशी की बेंच ने ओला, उबर, रैपिडो जैसी कंपनियों की अपीलें स्वीकार करते हुए अप्रैल के सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत मोटरसाइकिलें परिवहन वाहन की श्रेणी में आती हैं। इसलिए राज्य सरकार केवल इस आधार पर परमिट देने से इनकार नहीं कर सकती। संचालकों को संविदा परिवहन परमिट के लिए आवेदन करने का पूरा अधिकार है।
राज्य को निर्देश दिए गए हैं कि वह आवेदनों पर सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर विचार करे। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी धारा 74(2) के अनुसार सुरक्षा, बीमा और अन्य जरूरी शर्तें लगा सकते हैं। एग्रीगेटर कंपनियां नए आवेदन दाखिल कर सकती हैं, जिनका निपटारा कानून के मुताबिक होगा।
बेंगलुरु जैसे ट्रैफिक जाम वाले शहरों में बाइक टैक्सी सस्ता और तेज विकल्प साबित हुई हैं। यह फैसला शहरी गतिशीलता को बढ़ावा देगा, लेकिन सख्ती से नियमों का पालन जरूरी होगा। अन्य राज्यों के लिए भी यह एक मिसाल है, जहां ऐसी सेवाओं पर विवाद चल रहा है। कोर्ट का यह संतुलित रुख सराहनीय है।