
नई दिल्ली। वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ भारत की लड़ाई में दूरसंचार विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में बताया कि एफआरआई (फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर) सिस्टम से जोखिम भरे मोबाइल नंबरों की पहचान सरल हो गई है।
यह जोखिम आधारित मीट्रिक मोबाइल नंबरों को मध्यम, उच्च या बहुत उच्च धोखाधड़ी जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करता है। बैंक और यूपीआई प्रदाता इसकी मदद से संदिग्ध खातों पर त्वरित कार्रवाई कर पा रहे हैं।
हितधारकों की रिपोर्ट के मुताबिक, लेनदेन रद्द करने और अलर्ट भेजने से 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी रोकी गई। यह साइबर अपराधों के खिलाफ मजबूत ढाल साबित हो रहा है।
इसके अलावा, संचार साथी पोर्टल और ऐप नागरिकों को संदिग्ध कॉल्स रिपोर्ट करने, अपने नाम के कनेक्शन जांचने, चोरी हैंडसेट रिपोर्ट करने और डिवाइस वैरिफाई करने की सुविधा देता है।
संचार साथी से 8.33 लाख हैंडसेट बरामद, 2.24 करोड़ अनचाहे कनेक्शन कटे और 7.7 लाख रिपोर्ट्स पर 39.44 लाख नंबर ब्लॉक हुए। अंतरराष्ट्रीय स्पूफ्ड कॉल्स 99% कम हो गईं। ये प्रयास डिजिटल सुरक्षा को नई ऊंचाई दे रहे हैं।