
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में भारत का राजकोषीय घाटा 8.55 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जो पूरे वर्ष के 15.7 लाख करोड़ रुपये के बजट लक्ष्य का 54.5 प्रतिशत है। वित्त मंत्रालय के शुक्रवार जारी आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ है।
पिछले वर्ष की समान अवधि में यह घाटा पूरे लक्ष्य का 56.7 प्रतिशत था, जो दर्शाता है कि वित्तीय अनुशासन में सुधार हो रहा है। इस दौरान कुल प्राप्तियां 25.25 लाख करोड़ रुपये रही, जो वार्षिक अनुमान का 72.2 प्रतिशत है, जबकि व्यय 33.81 लाख करोड़ रुपये रहा, यानी 66.7 प्रतिशत लक्ष्य।
शुद्ध कर संग्रह 19.4 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल के 18.4 लाख करोड़ से अधिक है। गैर-कर राजस्व 5.4 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ा। पूंजीगत व्यय अवसंरचना पर जोर के कारण 7.9 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वर्ष के 6.9 लाख करोड़ से बेहतर है।
राज्यों को कर हस्तांतरण 10.38 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, जो 1.37 लाख करोड़ अधिक है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जीडीपी का 4.4 प्रतिशत घाटा लक्ष्य रखा है। यह कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा, उधार कम करेगा और विकास को गति देगा।