
वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में केंद्र सरकार के खर्च में समायोजन के चलते भारत का पूंजीगत व्यय 23.4 प्रतिशत सालाना गिरा है। आईसीआरए की ताजा रिपोर्ट में सामने आए इस आंकड़े ने आर्थिक गति पर ब्रेक लगाने का संकेत दिया है, हालांकि राज्यों का मजबूत प्रदर्शन और त्योहारी मांग ने इसे संभाल लिया।
दूसरी तिमाही की 16.7 प्रतिशत की तेजी के बाद कुल केंद्र-राज्य कैपेक्स 4.2 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 4.4 लाख करोड़ से कम है। 24 राज्यों के आंकड़ों से पता चलता है कि उनका संयुक्त कैपेक्स और शुद्ध ऋण 21.9 प्रतिशत उछला, जो 1.8 लाख से बढ़कर 2.1 लाख करोड़ हो गया—केंद्र के बराबर।
आईसीआरए का अनुमान है कि जीडीपी वृद्धि 8.2 प्रतिशत से घटकर 7.2 प्रतिशत रहेगी, लेकिन त्योहारों की डिमांड और जीएसटी लाभ से 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रहेगी। मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि नए आधार वर्ष में अनुमान लगाना कठिन है। कारणों में आधार प्रभाव, कैपेक्स कटौती, राज्यों का राजस्व खर्च सुस्ती और निर्यात कमजोरी शामिल हैं।
राजस्व व्यय में सुधार दिखा। केंद्र का गैर-ब्याज राजस्व खर्च 3.5 प्रतिशत घटा (पहले 11.2%), राज्यों में 2.7 प्रतिशत वृद्धि। कुल मिलाकर 0.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
यह तस्वीर राज्यों की भूमिका को रेखांकित करती है। केंद्र की सतर्कता के बीच राज्यों का सहारा आर्थिक स्थिरता बनाए रखेगा, लेकिन लंबी दौड़ के लिए पूंजीगत धक्का जरूरी है।