
नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच भारत ने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के आपातकालीन तेल भंडार जारी करने के महत्वपूर्ण फैसले का जोरदार स्वागत किया है। ईरान युद्ध से उत्पन्न आपूर्ति संकट के कारण तेल कीमतों में उछाल आ गया था, जिसे काबू करने के लिए यह कदम उठाया गया।
सरकारी बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की घटनाओं पर सरकार कड़ी नजर रखे हुए है। आईईए के प्रयासों के अनुरूप बाजार स्थिरता सुनिश्चित करने हेतु भारत आवश्यक कदम उठाने को तत्पर है। सहयोगी सदस्य के रूप में भारत अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
आईईए के 32 सदस्य देशों ने 40 करोड़ बैरल तेल के रिलीज पर सहमति जताई, जो प्रत्येक देश की स्थिति के अनुरूप बाजार में उपलब्ध होगा। कुछ राष्ट्र अतिरिक्त उपाय भी करेंगे।
सदस्यों के पास 1.2 अरब बैरल से अधिक भंडार हैं, जबकि उद्योगों के पास 60 करोड़ बैरल अतिरिक्त। यह आईईए का छठा ऐसा समन्वित प्रयास है, पहले 1991, 2005, 2011 व 2022 में हुआ।
कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल की विशेष बैठक के बाद लिया गया यह निर्णय पश्चिम एशिया संघर्ष से प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य की आपूर्ति बाधाओं पर केंद्रित है। 28 फरवरी से शुरू संकट ने निर्यात को 10 प्रतिशत से नीचे ला दिया।
2025 में प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल तेल इसी मार्ग से गुजरता था, जो वैश्विक व्यापार का 25 प्रतिशत है। वैकल्पिक मार्ग सीमित हैं। भारत के लिए यह कदम ईंधन मूल्यों को नियंत्रित कर अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा।