
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते के अंतरिम ढांचे के खुलासे के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि डेयरी क्षेत्र को इस डील से पूरी तरह बाहर रखा गया है। शनिवार को वाणिज्य भवन में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अमेरिका को डेयरी उत्पादों के आयात की कोई छूट नहीं दी गई है।
गोयल ने संवेदनशील कृषि उत्पादों की लंबी सूची गिनाई जिन पर कोई राहत नहीं मिली। इनमें मांस, मुर्गी, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेहूं, अनाज, चीनी, बाजरा, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, हरी मटर, मूंग, चना, तिलहन, पशु चारा और तंबाकू शामिल हैं। इससे घरेलू किसानों को किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
सेब और कपास के आयात पर मंत्री ने विस्तार से बताया। देश में सेब की खपत उत्पादन से कहीं अधिक है, इसलिए 6 लाख टन का आयात होता है। वर्तमान में बेस प्राइस 50 रुपये और 50 प्रतिशत टैरिफ से बाजार मूल्य 75 रुपये है। नई डील में बेस प्राइस 80 रुपये, टैरिफ 25 प्रतिशत और कोटा तय किया गया है, जिससे कीमत 100 रुपये हो जाती है। कपास में भी विशेष किस्मों का सीमित आयात जारी रहेगा।
सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। समझौते से मसाले, चाय, कॉफी, नारियल तेल, काजू, रत्न-आभूषण, फार्मा और स्मार्टफोन जैसे उत्पादों का अमेरिका में शून्य ड्यूटी पर निर्यात संभव होगा।
द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। इससे 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था में भारत के निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे और विकसित भारत 2047 का सपना साकार होगा।