
नई दिल्ली में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र से बाहर से दो और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) कार्गो रास्ते में हैं। ईरान से जुड़े मध्य पूर्व युद्ध के बीच तेल व गैस की सार्वजनिक कंपनियां आयात स्रोतों को विविधीकृत कर रही हैं, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि कच्चा तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित बनी हुई है। वर्तमान में आ रहे तेल की मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य से सामान्य आने वाले तेल से भी अधिक है।
तेल विपणन कंपनियों ने विभिन्न देशों से कई कार्गो बुक कर लिए हैं। पहले 55 प्रतिशत तेल होर्मुज मार्ग से आता था, अब 75 प्रतिशत वैकल्पिक रास्तों से पहुंच रहा है।
घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की बुकिंग में उछाल पर शर्मा ने कहा कि डिलीवरी समय अभी भी 2.5 दिन का है, इसलिए उपभोक्ताओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं। सरकार ऊर्जा आपूर्ति पर नजर रखे हुए है और आवश्यक कदम उठा रही है।
देश में एलपीजी उत्पादन में 25 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका बड़ा हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए आवंटित हो रहा है। रिफाइनरियां अधिकतम क्षमता पर चल रही हैं, कुछ तो 100 प्रतिशत से ऊपर।
कुल गैस खपत 189 एमएमएससीएमडी है, जिसमें 97.5 एमएमएससीएमडी घरेलू उत्पादन है। ईरान युद्ध से 47.4 एमएमएससीएमडी प्रभावित हुआ है, खासकर कतर के उत्पादन रोकने से, जो भारत का सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि रसोई गैस में कोई कमी नहीं। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत घरेलू पीएनजी, सीएनजी और एलपीजी को प्राथमिकता मिलेगी। रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह रणनीति मध्य पूर्व संकट में भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को मजबूत करती है, प्राथमिक क्षेत्रों की आपूर्ति सुनिश्चित करते हुए।